खोराबार टाउनशिप-मेडिसिटी योजना बुलडोजर के आगे लेटीं महिलाएं, बोलीं- पहले हम पर चलाओ फिर मकान पर

गोरखपुर जिले में खोराबार टाउनशिप एवं मेडिसिटी योजना के लिए अधिग्रहित जमीन पर अतिक्रमण को हटाने में जीडीए का विरोध बढ़ता ही जा रहा है। बुधवार को जीडीए की टीम बुलडोजर से टीनशेड के मकान को ढहाने के बाद जब पक्के मकान की ओर बढ़ी तो महिलाओं ने विरोध में मोर्चा खोल दिया। वे बुलडोजर के आगे लेट गईं। बोलीं कि यदि मकान तोड़ना है तो बुलडोजर पहले हमारे ऊपर चलाओ..। यह देखकर जीडीए के अधिकारी हाथ पैर फूल गए। हालांकि, जीडीए की टीम एहतियात के तौर पर पुलिस और पीएसी को साथ लेकर पहुंची थी। कुछ देर तक महिलाओं का विरोध चलता रहा। कुछ देर तक अधिकारियों और नागरिकों के बीच नोकझोंक भी हुई, विरोध को देख जीडीए की टीम लौट आई।

बुधवार की दोपहर करीब 12.40 बजे एसडीएम पीके सिंह, प्रभारी मुख्य अभियंता किशन सिंह, सहायक अभियंता राज बहादुर सहित अन्य लोग पुलिस और पीएसी के साथ खोराबार के पड़ाका चौराहे पर पहुंचे। वहां एक प्लाॅट में बुलडोजर से टीनशेड को ढहा दिया गया। टीम के आने की सूचना पर सैकड़ों की संख्या में स्थानीय महिलाएं, पुरुष, बच्चे और युवतियां जुट गईं। टीनशेड ढहाने का विरोध किसी ने नहीं किया, लोग तमाशबीन बने रहे।

इसके बाद बुलडोजर कैंट थाना क्षेत्र के सिघड़ियां निवासी विमला देवी पत्नी फयानाथ के मकान की तरफ पहुंचा। मकान के गेट पर ताला बंद था। जीडीए के अधिकारियों ने चालक को 1.50 बजे कार्रवाई का निर्देश दिया। चालक ने जैसे ही बुलडोजर चलाया। सबसे पहले बुजुर्ग कौशिल्या देवी आगे आ गईं। इसके बाद एक-एक करके पूनम दुबे, सुनीता वर्मा सहित 50 से अधिक महिलाएं आ गईं। लोगों ने कहा कि मकान में रहने वाले किसी का उपचार कराने लखनऊ गए हैं, इसलिए उनका मकान न तोड़ा जाए। यदि तोड़ना है तो बुलडोजर उनके ऊपर से ले जाएं।

इसके बाद स्थानीय लोगों और जीडीए अधिकारियों के बीच नोकझोक होने लगी। लोगों ने अधिकारियों को याद दिलाया कि जब आप लोग दो दिन पहले आए थे, तब पक्के मकानों को न तोड़ने का आश्वासन दिया था। अधिकारियों ने बताया कि यह मकान खाली है। इसलिए इसे तोड़ा जाएगा। इस दौरान कुछ लोगों ने मकान तोड़ने के संबंध में आदेश की कॉपी मांगी।

अधिकारियों ने पूछा कि यदि आदेश की कॉपी होगी तो क्या मकान तोड़ने देंगे? इसे लेकर काफी देर तक बातचीत होती रही। बाद में जीडीए अधिकारी फोर्स और बुलडोजर लेकर जंगल सिकरी बाईपास पर चले गए। इस दौरान उनके पीछे-पीछे करीब एक किलोमीटर तक लोग चलते रहे। दोपहर 2.45 बजे तक बुलडोजर के नहीं लौटने पर लोग अपने घर चले गए। हालांकि इसके बाद भी घंटों गहमागहमी बनी रही।

सर्व ब्राह्मण समन्वय समिति ने जताया विरोध
सर्व ब्राह्मण समन्वय समिति ने जीडीए की कार्रवाई का विरोध जताते हुए निंदा की है। बुधवार को प्रेस क्लब सभागार में बैठक करके क्षेत्र में 550 मकानाें को बचाने की अपील की। पदाधिकारियाें ने कहा कि किसी के मकान को गिराकर दुकान और मकान बनाना मानवहित में नही है। उम्मीद जताई कि जीडीए अधिकारियों को सद्बुद्धि आएगी। इस दौरान पंडित रघुनंदन उपाध्याय, दुर्गेश मिश्र, अजय पांडेय, विद्यापति पाठक, रघुनंदन उपाध्याय, विजय शंकर मिश्र, वीरेंद्र पांडेय, दुर्गेश मिश्र, अनूप कुमार मिश्रा, एडवोकेट योगेंद्र मिश्र, अनूप मिश्र सहित अन्य पदाधिकारीगण मौजूद रहे।

सीएम से मिलने नहीं दिया जा रहा
हम लोगों को सीएम से मिलने नहीं दिया जा रहा है। सीएम को चाहिए कि गोरखनाथ मंदिर के किसी व्यक्ति को यहां भेजकर पूरी तरह से छानबीन करा लें। हम लोग विकास के विरोध में नहीं हैं। लेकिन घर टूटने पर कहां जाएंगे। -पूनम सिंह

घर टूटने पर कहां रहेंगे
20 से 25 साल पुराने मकान बने हैं। लोग इसमें परिवार के साथ रहते हैं। जब से बुलडोजर चलने की बात आई है। तब से न तो कोई सो रहा है, न ही भूख प्यास लग रही है। बच्चे भी परेशान रहते हैं कि घर टूटने पर कहां रहेंगे। – सुनीता वर्मा

सीएम को गुमराह कर रहे अधिकारी
जीडीए अधिकारी बार-बार सीएम को गुमराह कर रहे हैं। यहां योजना बसाने के लिए घरों को तोड़ना कहां का न्याय है। उम्मीद है कि सीएम हम लोगों के मामले का हल निकालेंगे। बस उन तक यह मामला पहुंच जाए। – इंदू तिवारी

बुलडोजर चलाने से पहले करें समाधान
सबकी यही मांग है कि जिनमें लोग रहते हैं, उन मकानों के खिलाफ कार्रवाई न की जाए। बुलडोजर चलाने के पहले पूरे मामले का हल निकाल लिया जाए। बुलडोजर आने की सूचना पर हर कोई सहम जाता है। – राजेश तिवारी

स्थानीय लोगों से सहयोग की अपेक्षा
खोराबार एवं जंगल सिकरी में जीडीए के अधिग्रहित भूमि से अतिक्रमण हटाया जा रहा है। साथ ही प्रभावित परिवारों के संंबंध में भी मानवता का दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है। आपसी बातचीत के माध्यम से जल्दी ही योजना को आगे बढ़ाया जाएगा। प्रथम चरण में बाउंड्रीवॉल तथा ऐसे निर्माण जिनमें कोई परिवार नहीं रहते हैं, उनको ही हटाया जा रहा है। स्थानीय लोगों से सहयोग की अपेक्षा है। – महेंद्र सिंह तंवर, उपाध्यक्ष, जीडीए

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